आज धरा पर , उतर्या जी तारा प्रकाश बाईसा म्हाने लागो जी प्यारा Paras Baisaa Kavia
Chirja Prakash Baisaa
A Chirja by Paras Baisaa Kavia
तर्ज =-दल बादल बिच चमके जी तारा
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आज धरा पर , उतर्या जी तारा
प्रकाश बाईसा म्हाने लागो जी प्यारा
कांई गुणगान करू म्हारी माय
1- मन मोहक ,आभा मुख छायी -2
तो कौटिक भान रया शरमायी
रवी शशी करे निछरावळ आय
कांई गुणगान करू म्हारी माय
2 - स्वर्ग से सुंदर श्री मंढ लागे -2
तो त्रिभुवन नीर भरे इण आगे
सुर तैंतीस खड्या थांरे द्वार
कांई गुणगान करू म्हारी माय
3 - नैणा से मेह अमी रस बरसे - 2
तो निरखत रूप हियो म्हारो हरसे
मोतियन मेह बरसावे म्हारी माय
कांई गुणगान करू म्हारी माय
4 - हिरदा मे नाम लिख्यो मां आपरो-2
तो पारस के आपरो अडीग आसरो
अमर कसुंबो ओढाओ म्हारी माय
नित उठे दरस करूं म्हारी माय
पारस कविया
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